Thursday, 1 January 2015

मेरा रखवाला सबसे बड़ा

मेरा रखवाला सबसे बड़ा
हर पल वो मेरे साथ खड़ा||

मुझको फिर क्या चिंता है
जब उनका हाथ रखा है
उनको तो सब सुलभ है
जिसमे हो मेरी भलाई
करते है प्रभु वो सदा ही
मुझको तो रहना है कृपा की छाया मे .....
मेरा रखवाला............

जब प्रभु के दर मे जाता
देख के मुझको आता
प्रभुजी यो मुझसे कह रहे है
दुखो से मत घबराना
बस मुझको आवाज़ लगाना
रक्षा करूँगा तेरी तूफ़ानो मे....
मेरा रखवाला............

बचपन से इनको जाना
इनको ही अपना माना
ये मेरे प्राणो के आधार है
जब मन मे कुछ दुविधा हो
आकर इनको बतलाना
तेरे सब काम होंगे इशारो मे...
मेरा रखवाला............

Wednesday, 24 December 2014

रेल से अजब निराली है

इस काया की रेल - रेल से अजब निराली है|
ज्ञान, धरम के पहिए लागे,
कर्म का इंजन लगा है आंगे,
पाप-पुण्य की दिशा मे भागे,
२४ घड़ी ये खुद है जागे,
शुरु हुआ है सफ़र अभी ये गाड़ी खाली है||
इस काया की रेल ............

एक  राह है रेल ने जाना
जिसको सबने जीवन माना
हर स्टेशन खड़ी ट्रेन है
अंदर आओ जिसको है जाना
झंडी हरी मिली रेल अब जाने वाली है||
इस काया की रेल ............

जिसको भी मंज़िल पहुचाया
उससे पुण्य का भाड़ा पाया
पाप की गठरी खूब कमाया
जिस पथिक को मार्ग गुमाया
मद योवन मे डूबी रेल ये रेल मतवाली है||
इस काया की रेल ............

पाप पुण्य का हिसाब मगाया
यॅम का आज निमंत्रण आया
गार्ड ने लाल झंडी दिखाया
आख़िरी स्टेशन बतलाया
अब कितना भी करलो जतन रेल नही चलने वाली है||
इस काया की रेल ............

Monday, 22 December 2014

मुझे चलना है बस चलने दो

मै राह चला हूँ प्रीत मिलन की
मुझे चलना है बस चलने दो ||

प्रीत लगी जब दिव्य ओज से
उस ओज मे जाकर मिलना है
मोह पतंगे को ज्वाला का
ज्योति मे जाकर जलना है
मन को निर्मल करने मे
तन जलता है तो जलने दो |
मै राह चला हूँ प्रीत मिलन की
मुझे चलना है बस चलने दो ||

हर एक बूँद का लक्ष्य नही
सागर मे विलीन हो जाना
जीवन दायिनि बनने के लिए
कुछ का घरा मे खो जाना
जीवन देने की चाहत मे
अस्तित्व खोता है तो खोने दो |
मै राह चला हूँ प्रीत मिलन की
मुझे चलना है बस चलने दो ||

शून्य से द्विगुणित होकर
हर अंक शून्य बन जाता है
श्याम विविर मे मिल करके
हर रंग श्याम बन जाता है
श्याम मिलन की चाहत मे
रंग ढलता है तो ढलने दो |
मै राह चला हूँ प्रीत मिलन की
मुझे चलना है बस चलने दो ||

दरिया को पार करने मे
पैरो पर कीचड़ लगता है
लेकिन पथिक कब राहो की
कठिनाइयो से डरता है
मिट्टी की इस काया पर
कीचड़ लगता है तो लगने दो |
मै राह चला हूँ प्रीत मिलन की
मुझे चलना है बस चलने दो||

Sunday, 23 November 2014

एक तुच्छ बूँद सा जीवन दे दो

फसल खड़ी है खेतो मे
उष्णता उन्हे जलाती है
धधक रही है धरती भी
पर बूँद नज़र नही आती है||

किनारे बैठ मै देख रहा
बच्चे जो मेरे झुलस रहे
दिन तपन लिए जब आता है
रात तारो से भर जाती है||

पक्षी भी तड़फ़ उठे अब तो
चातक भी थक कर चूर हुआ
धरती भी प्यासी है कब से
बरसात क्यो नही आती है||

मै भी तेरा ही एक अंश हू
अंश को थोड़ा जीवन दे दो
एक झलक दिखा दो बदली की
एक तुच्छ बूँद सा जीवन दे दो||

तुम्ही से जग की घटा निराली
तुम से ही वन मे हरियाली
तर्पण जो थोड़ा तुम कर दो
तो दूर हो ये बदहाली||

अगर तेरे कोई उपर है
कोई तेरा सर्वेस्वर है
तो उससे जाकर तू कह दे
कि वो मेरा भी ईश्वर है||

Wednesday, 19 November 2014

विज्ञान और धर्म



विज्ञान और धर्म की ऐसी एक पहचान हो
विज्ञान ही धर्म हो और धर्म ही विज्ञान हो|
आतंक हिंसा भेदभाव मिटें इस संसार से
एक नया युग बने रहे जहाँ सब प्यार से||
विज्ञान जो है सिमट गया उसकी नयी पहचान हो
मेरा तो कहना है, कि हर आदमी इंशान हो||
हर आदमी पढ़े बढ़े नये-2 अनुसंधान हो
उन्नति के रास्ते चले, पर सावधान हो||
प्यार का संवाद समस्त विश्व के दरमियान हो
महानता का वर्चस्व लिए विज्ञान ही महान हो||

Thursday, 23 October 2014

इस बार नही आ पाऊँगा

दुख शायद तुमको भी होगा,
पर खुश मैं भी ना रह पाऊँगा|
कोशिश तो मैं बहुत करूँगा
पर इस बार नही आ पाऊँगा||

ह्रदय विषप्त मेरा भी होगा
नयनो मे नीर आ जाएगा
दहलीज पर लड़ते लड़ते हा
आंशु फिर से मर जाएगा||
उत्तरदायित्वओ से दबा हुआ हू
इतनी जल्दी ना जीत पाऊँगा
पर मन मैं एक विश्वास है
जल्दी घर वापस आऊँगा||
कोशिश तो मैं बहुत करूँगा
पर इस बार नही आ पाऊँगा.......

जब सूरज की मध्यम किरण
चौखट को छूने आएगी
हवा भी जब भीगी -2
खुश्बू हर तरफ महकाएगी|
घर के आगन मे बैठे जब
सब गीत खुशी के गाएँगे
मन ही मन गुनगुनता रहूँगा
पर साथ नही गा पाऊँगा||
कोशिश तो मैं बहुत करूँगा
पर इस बार नही आ पाऊँगा..........

Thursday, 2 October 2014

धूम्रपान

गॉव-२ और गली-२ मे
फैल गया इसका कहर
संसार की सर्वाधिक बिक्री
वाला ये स्वादिष्ट जहर||

धूम मचा दे रंग जमा दे
जीते जी अर्थी उठवा दे
जिन्दो की अर्थी उठवाये
फिर भी बेवखूफ़ गुटका खाए||

हुई नपुंसक युवा पीढ़ी
केंसर ने किया अट्टहास
दातो का हुआ कबाड़ा
सेहत का हो गया सत्यानाश||

अक्ल का अँधा खाने वाला
जहर खरीद कर ख़ाता जाए
पैसे निर्माता देखो कैसे
जहर बेचकर माल कमाए||


रंग बिरंगे पैकेट मे है
ज़हरीला पान मसाला
केंसर की प्रयोगशाला
बन गया है खाने वाला|

गुटका हँस -२ के कहता है
मै कितना सर्वव्यापी हूँ,
हे मूर्ख मुझे खाने वाले
मै यमराज की कार्बन कापी हूँ|

Thursday, 21 August 2014

माँ का साया


आज बैठकर सोचा मैने
क्या खोया क्या पाया है
एक चीज़ जो साथ रही
वो तो बस माँ का साया है||

आज मुझे हा याद नही
अपने बचपन की बाते
माँ ने क्या-२ कष्ट झेले
तब मिली मुझे ये काया है||

संसार मे जब मैने जन्म लिया
ना जाने कितना रोया था
पर सारी दुनिया को भूल
माँ के आचल मे निडर हो सोया था||

मुझे ठीक से याद नही
तब उम्र बड़ी मेरी छोटी थी
माँ ने जो मेरे बाद मे खाई
शायद वो सूखी रोटी थी||

जब भी मै बीमाँर पड़ा
दवाये दी मुझे सारे जहा की
मै रात को ठीक से सो पाया
क्योकि रात ही नही हुई उस दिन माँ की||

बच्चो की खुशियो की खातिर
जो सारी-२ रात जागी है
ऐसी माँ को दामन छोड़
ये दुनिया क्यो आज भागी है||

याद नही तुझको वो दिन
जब नीद तुझे ना आती थी
तब माँ तुझको पास बिठाकर
मीठी सी लोरी सुनाती थी||

तेरी खुशियो की खातिर वो
हर दिन मन्दिर जाती थी
दूर गया जब नौकरी पर तू
भूल गया वो पाती थी||

जिसने तुझको चलना सिखलाया
तू उसको चाल सिखाता है
जिसने तुझको गिनती सिखलाई
तू उसको काम गिनता है||

जिसका हाथ पकड़ कर चलना सीखा
तू आज उसे दोडाता है
जिसने तुझको संसार दिखाया
तू उसको आंख दिखता है||

जब भी तुझ पर कोई आँच आई
तब माँ का खून था खौल गया
दो पैसे क्या कमाँने लगा
तू माँ को अपनी भूल गया||

Monday, 18 August 2014

जिंदगी ऐसी ना रही और ना वैसी रही

जिंदगी ऐसी ना रही और ना वैसी रही
तुमसे मिलकर ना ये पहले जैसी रही
तुम जो कहती हो, वही लगता है सही
तुम ना मिलती तो, रह जाती बाते अनकही||

तुम जो दिखाती हो अब दिखता है वही
पर अभी तक तुम मिली क्यो नही
छुपी हो यही मेरे आस-पास कही
तुम्हे पाकर के करना है मुझे अनकही||

जब सोचता हूँ कि मुझे तुम मिलोगी कभी
तो लगता है कि जैसे मिल गयी हर खुशी
पर डरता हूँ कि तुम खो ना जाओ कभी
मेरी कहानी ना रह जाए  फिर अनकही||

आँखो मै मेरे जो है सपने बसे
डरता हूँ न सुनके ये दुनिया  हसे
मेरा हर सपना है तुमसे जुड़ा
आज या कल हुमको मिलाएगा खुदा||

सोचकर बस यही मै अब जी रहा हूँ
भूल भी चुका हूँ की खुद मै कहा हूँ
लौट आ तू अब सबकुछ छोड़कर
मिल जा मुझे अब किसी मोड़ पर||

Saturday, 9 August 2014

ऐसी मेरी एक .बहना है


ऐसी मेरी एक .बहना है
नन्ही छोटी सी चुलबुल सी
घर आँगन मे वो बुलबुल सी
फूलो सी जिसकी मुस्कान है
जिसके अस्तित्व से घर मे जान है
उसके बारे मे क्या लिखू
वो खुद ही एक पहचान है
मै चरण पदिक हू अगर तो
वो हीरो जड़ा एक गहना है
ऐसी मेरी एक .बहना है...........


कितनी खुशिया थी उस पल मे
जब साथ-२ हम खेला करते
छोटी छोटी सी नाराजी
तो कभी हम आपस मे लड़ते
कभी मानती वो मुझको तो
कभी मै उसको मानता था
उपर से गुस्सा कितना भी
पर मन ही मन मुस्काता था
गुस्से मे वो मुझसे कहती
मुझको नही अब यहाँ रहना है
ऐसी मेरी एक बहना है...........


घर से जब मै दूर गया
पैसे चार कमाने को
कुछ सपने पूरे करने को
कुछ सपने नये बनाने को
बहना सब को है बतलाती
कि भैया बहुत कमाता है
रहता है घर से दूर बहुत
पर मुझसे मिलने आता है
मेरा भाई लाखो मे एक
सबसे उसका ये  कहना है
ऐसी मेरी एक बहना है...........